फ्रांस में जीवन यापन की बढ़ती लागत, वेतन वृद्धि और स्कूल फंडिंग की मांगों को लेकर हो रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए शनिवार को देशभर में 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। पिछले सप्ताहांत हुई हिंसा और लूटपाट की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने पेरिस में मार्च के रास्तों को सीमित कर दिया है, प्रमुख संग्रहालयों को बंद रखा गया है और कई शहरों में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने पुष्टि की कि सुरक्षा अभियानों के दौरान 135 लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई हथियार जब्त किए गए हैं।
छात्रों और श्रमिकों ने वेतन वृद्धि, छात्र अनुदान में बढ़ोतरी और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन जारी रखा है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों और व्यवसायों की सुरक्षा के लिए ये प्रतिबंध आवश्यक हैं, जबकि ट्रेड यूनियनों ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। तनावपूर्ण स्थिति के बीच ल्योन सहित कई शहरों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहनों और पानी की बौछारों का भी सहारा लिया गया है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि ये प्रदर्शन इटली, स्पेन और अल्बानिया जैसे अन्य देशों में चल रहे विरोधों के साथ मेल खा रहे हैं। हालांकि मैक्रों ने सुधारों पर चर्चा के लिए छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक ठोस उपाय लागू नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

