केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर राहुल गांधी द्वारा की गई आलोचना का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में बैंक को प्रभावशाली लोगों को ऋण देने के लिए मजबूर किया गया था, जिसके कारण इसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के करीबी व्यावसायिक समूहों को दिए गए ऋणों के एनपीए (NPA) में बदलने से ही बैंक की स्थिति खराब हुई थी।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाकर बैंक को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बैंक के पुनर्गठन में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। साथ ही, उन्होंने फरवरी 2024 में जारी भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र के तथ्यों को आज भी प्रासंगिक बताया।
सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के दौर में जहां प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब आम लोगों के लिए ऋण लेना आसान हो गया है। उन्होंने दावा किया कि बैंक अधिकारियों पर अब कोई राजनीतिक दबाव नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह राफेल मामले में उनके झूठ का पर्दाफाश हुआ था, उसी तरह इस मामले में भी सच्चाई सामने आएगी।


