जर्मनी के कई शहरों में शनिवार को बढ़ती महंगाई के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। फ्रैंकफर्ट, बर्लिन, कोलोन और हैम्बर्ग में रात होते ही स्थिति बिगड़ गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और सुरक्षा बलों पर हमले किए। फ्रैंकफर्ट में दंगाइयों ने दुकानों के शीशे तोड़े और आपातकालीन सेवाओं पर पटाखों व मोलोटोव कॉकटेल से हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। हेस के आंतरिक मंत्री रोमन पोसेक ने इस हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों में वामपंथी चरमपंथी शामिल हो गए थे।
'जेन जेड रीगेल्ट' (Gen Z regelt) समूह द्वारा आयोजित इन प्रदर्शनों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए अधिक बजट की मांग की गई थी, साथ ही सार्वजनिक खर्च में कटौती और अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध किया गया। देश भर के प्रमुख शहरों में लगभग 18,000 लोग सड़कों पर उतरे थे। हालांकि दिन में अधिकांश मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रात होते ही हिंसा भड़क गई। पुलिस फ्रैंकफर्ट में एक बंदूक की दुकान से हथियार चोरी होने की घटना सहित अन्य हिंसक वारदातों की जांच कर रही है। यूरोप के अन्य देशों जैसे फ्रांस, इटली और पुर्तगाल में भी युवाओं द्वारा इसी तरह के प्रदर्शन किए जा रहे हैं।



