कोयंबटूर में ₹300 करोड़ की लागत से निर्मित 'पेरियार अरिवुलगम' पुस्तकालय में पुस्तकों की खरीद और उनमें दी गई गलत जानकारी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा 16 अक्टूबर को उद्घाटन किए गए इस पुस्तकालय का दौरा करने वाले प्रसिद्ध लेखक पेरुमल मुरुगन ने कई गंभीर विसंगतियां उजागर की हैं। उन्होंने बताया कि एक पुस्तक में 'नालदियार' को एक दार्शनिक बताया गया है, जबकि वास्तव में यह जैन मुनियों द्वारा रचित 400 कविताओं का संग्रह है। इसके अलावा, एक अन्य पुस्तक में 1947 में 'मुथुवेलु सुब्बैया अय्यर' को तमिलनाडु का पहला मुख्यमंत्री बताया गया है, जो ऐतिहासिक रूप से गलत है। मुरुगन ने पुस्तकों की अत्यधिक कीमतों पर भी सवाल उठाए हैं, जहां ₹350 मूल्य वाली पुस्तक के लिए ₹1,445 वसूले गए हैं।
यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया है कि पुस्तक चयन समिति और परियोजना का गठन पिछली द्रमुक (DMK) सरकार के दौरान हुआ था। वहीं, द्रमुक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विवादित पुस्तकों पर 22 जून की मुहर है, जो सत्ता परिवर्तन के बाद की तारीख है। द्रमुक ने खरीद आदेशों और भुगतान के विवरण को सार्वजनिक करने की मांग की है। विवाद के बीच, स्कूली शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई है। अब जांच से ही स्पष्ट होगा कि इन पुस्तकों के चयन और खरीद के लिए कौन जिम्मेदार है।

