29 अक्टूबर 2026 को चेन्नई से नौ कर्मचारियों के साथ रवाना हुई सेल्वझगन की मछली पकड़ने वाली नाव 'मुरसु' चक्रवात की चेतावनी के बाद आंध्र प्रदेश के निजामपट्टनम बंदरगाह पर सुरक्षित खड़ी की गई थी। 2 नवंबर की रात रामायपट्टनम की ओर जाते समय नाव का इंजन खराब हो गया और 3 नवंबर की सुबह वायरलेस के जरिए इसकी सूचना मिली। इसके बाद से नाव का संपर्क टूट गया था। सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने भारतीय तटरक्षक बल के होवरक्राफ्ट, गश्ती जहाजों और विमानों की मदद से व्यापक खोज अभियान शुरू किया। दुर्भाग्यवश, नाव चक्रवात में डूब गई और पांच मछुआरों की मौत हो गई, जिनके शव 5 नवंबर को बरामद किए गए।
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य के वित्त मंत्री ने आंध्र प्रदेश पहुंचकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई, जबकि मुख्यमंत्री ने मृतक मछुआरों के परिवारों के लिए 7 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की, जिसमें से 2 लाख रुपये का चेक तत्काल जारी कर दिया गया। शेष दो मछुआरों के शव भी खोज अभियान के दौरान बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
इस दुखद घड़ी में राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवारों के साथ सरकार पूरी तरह खड़ी है। इस आपदा की विस्तृत जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा कड़े सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
