कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पर अपने 26 दिवसीय अनशन के समापन के दौरान किए गए समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक का दावा है कि मंत्रियों ने उनसे वादा किया था कि उनके साथ हुई आधी रात की बैठक की तस्वीरें तब तक जारी नहीं की जाएंगी, जब तक कि विपक्षी और छात्र नेताओं को संयुक्त घोषणा में शामिल नहीं कर लिया जाता। उन्होंने बताया कि इस समझौते के समय खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी भी वहां मौजूद थे।
वांगचुक ने कहा कि इन आश्वासनों के बावजूद, बैठक के कुछ ही मिनटों के भीतर उनके अनशन तोड़ने की तस्वीरें मीडिया में जारी कर दी गईं। इस घटना से निराश वांगचुक ने राजनीतिक नेताओं की ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका भरोसा टूट गया है। उन्होंने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया कि उन्होंने अपना विरोध समाप्त करने के लिए सरकार के साथ कोई निजी समझौता किया था।
गौरतलब है कि वांगचुक ने NEET मुद्दे पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध के समर्थन में 28 जून को जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था। बाद में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पेपर लीक विरोधी कानून से संबंधित वीडियो संदेश मिलने के बाद उन्होंने 24 जुलाई को अपना अनशन समाप्त किया था।
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