वित्त मंत्रालय ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया है। इस प्रस्तावित बदलाव के जरिए सरकार को यूपीआई सहित डिजिटल भुगतान के विभिन्न माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का अधिकार मिल जाएगा। जनवरी 2020 से यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से शुल्क मुक्त हैं, लेकिन डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब इस मॉडल पर विचार कर रही है।
पेमेंट कंपनियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान क्षेत्र के विस्तार के लिए यह कदम जरूरी है। पीबी पे (PB PAY) के सीईओ हर्ष वर्धन मास्ता ने कहा कि बड़े व्यापारियों के लेनदेन पर एमडीआर लगाने से तंत्र अधिक मजबूत होगा, जबकि एयरपे (airpay) के संस्थापक कुणाल झुनझुनवाला ने इसे विकास के अगले चरण के लिए आवश्यक संतुलित आर्थिक ढांचा बताया। वर्तमान में भारत के कुल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 88 प्रतिशत है।
हालांकि, इस विधायी कदम का आम उपभोक्ताओं पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। यह विधेयक केवल शुल्क लगाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करता है, न कि सीधे तौर पर उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क थोपता है। भविष्य में एमडीआर लागू करने का निर्णय सरकार की विशिष्ट अधिसूचनाओं और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।
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