मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य भर की सभी सार्वजनिक सड़कों और गलियों से जातिसूचक नाम हटाने के मौजूदा आदेशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति एन. रमेश ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया, जिसमें पुलिस दस्तावेजों में अभी भी जाति आधारित पहचान का उपयोग किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।
अदालत ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने 1978 में ही इन नामों को हटाने का आदेश दिया था, जिसका विभिन्न न्यायिक फैसलों में समर्थन किया गया है। न्यायमूर्ति रमेश ने इस बात पर चिंता जताई कि 2026 में भी ये पहचान बरकरार हैं। उन्होंने कहा कि आदि द्रविड़ कल्याण विभाग का नाम बदलकर सामाजिक न्याय विभाग किए जाने के बाद, अब इन आदेशों को पूरी तरह लागू करने का यह सही समय है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रजिस्ट्री को इसे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, राज्य भर में जातिसूचक नामों को हटाने संबंधी सरकारी और न्यायिक निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए जांच शुरू की गई है।



