सुप्रीम कोर्ट 20 जुलाई को संसद की ओर हुए छात्र मार्च के दौरान पुलिस की भूमिका की जांच के लिए बुधवार को एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के नेतृत्व वाली इस समिति में एक पूर्व उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। यह पैनल प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के साथ ही बल प्रयोग के आरोपों की भी जांच करेगा।
न्यायालय ने वकीलों से मंगलवार शाम तक समिति के कार्यक्षेत्र पर सुझाव मांगे हैं। यह जांच वीडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और घायलों के लिए अंतरिम मुआवजे जैसे मुद्दों पर विचार होगा। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में कार्रवाई को कानून सम्मत बताते हुए कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक था। पुलिस ने बताया कि इस दौरान उनके 248 कर्मी घायल हुए और वे न्यायिक जांच में पूर्ण सहयोग देंगे। समिति अपनी अंतिम सिफारिशें देने से पहले पीड़ितों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी देगी।



