कांग्रेस कार्य समिति ने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के केवल पहले दो पद गाने के अपने निर्णय को दोहराया है। पार्टी का कहना है कि यह नीति 1937 के उस प्रस्ताव के अनुरूप है, जिसे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे ऐतिहासिक नेताओं का समर्थन प्राप्त था। हाल ही में सरकार ने सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत का पूर्ण संस्करण गाने का निर्देश दिया है।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए पार्टी को 'नई मुस्लिम लीग' करार दिया है। भाजपा का आरोप है कि यह निर्णय देशभक्ति की कमी को दर्शाता है और पार्टी हितों को राष्ट्र से ऊपर रखता है। इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी पर भी पूर्ण संस्करण न गाने के आरोप लगे थे।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भाजपा के आरोपों को राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। वहीं, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बचाव करते हुए कहा कि संक्षिप्त संस्करण को ऐतिहासिक रूप से सभी राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं ने स्वीकार किया था। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि यह प्रथा गलत है, तो ऐतिहासिक नेताओं को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।



