वर्ष 2015 से भारत लगातार चीन की तुलना में अधिक वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर दर्ज कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अनुमानित विकास दर 7.7 प्रतिशत रही, जबकि चीन की विकास दर 5 प्रतिशत दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं का अनुमान है कि भारत दशक के शेष वर्षों में भी अपनी इस तेज विकास गति को बनाए रखेगा।
हालांकि, चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी भारत से काफी बड़ी है। वर्ष 2025 में चीन की नाममात्र जीडीपी लगभग 19.5 ट्रिलियन डॉलर रही, जो भारत की 3.96 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से लगभग पांच गुना अधिक है। जहां भारत की वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू खपत और सेवा क्षेत्र पर आधारित है, वहीं चीन वर्तमान में रियल एस्टेट संकट और बदलती वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के बीच संरचनात्मक बदलावों से जूझ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए चुनौती अपनी उच्च विकास दर को दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों में बदलने की है, जिसमें उत्पादकता, विनिर्माण क्षमता और जीवन स्तर में सुधार शामिल है। भारत के पास वर्तमान में विकास की गति का लाभ है, लेकिन चीन के साथ पिछले तीन दशकों में बने बड़े आर्थिक अंतर को पाटने के लिए भारत को लंबी अवधि तक इस बढ़त को बनाए रखना होगा।



