भारत के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर के कारण पानी का संकट गहरा गया है। तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के साथ ही जालौन जिले में दलित परिवारों के लिए स्थिति और भी विकट हो गई है, जहां उन्हें जातिगत भेदभाव के चलते सार्वजनिक हैंडपंपों के उपयोग से रोका जाता है। दलित निवासियों का आरोप है कि उन्हें ऊंची जाति के लोगों के बाद घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार उनके पानी लेने के बाद हैंडपंप को शुद्ध करने के नाम पर धोया जाता है।
दलित डिग्निटी एंड जस्टिस सेंटर के अनुसार, 2025 में क्षेत्र में जातिगत अत्याचार के 113 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कई विवाद पानी तक पहुंच को लेकर हुए। परमी देवी नामक एक निवासी ने आरोप लगाया कि तीन साल पहले पानी के विवाद में उन पर हमला किया गया था, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों और प्रभावशाली वर्ग के लोगों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल जीवन मिशन जैसी सरकारी योजनाओं के बावजूद, जलवायु परिवर्तन सामाजिक असमानताओं को और अधिक बढ़ा रहा है।




