भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा 25 अगस्त 2016 को शुरू की गई UPI सेवा पिछले एक दशक में भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई है। वित्त वर्ष 2016-17 में 1.78 करोड़ लेनदेन से बढ़कर, यह संख्या 31 जुलाई 2026 तक 24,162 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। इस दौरान लेनदेन का कुल मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 66 करोड़ लेनदेन हो रहे हैं।
स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, किफायती इंटरनेट और QR कोड प्रणाली के कारण UPI से जुड़े बैंकों की संख्या 44 से बढ़कर 703 हो गई है। यह सेवा अब शहरी क्षेत्रों से निकलकर ग्रामीण इलाकों और छोटे व्यापारियों तक पहुंच चुकी है, जिससे वित्तीय समावेशन को बड़ा बढ़ावा मिला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त UPI अब संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस और सिंगापुर सहित 11 देशों में सक्रिय है।


