प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गहरी नाराजगी जताई है। मासिक 'प्रगति' बैठक के दौरान उन्होंने शीर्ष नौकरशाहों से सवाल किया कि क्या अब चौथे पक्ष (फोर्थ-पार्टी) से ऑडिट कराने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान थर्ड-पार्टी ऑडिट मानक उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों के बजाय एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखा जाना चाहिए।
नौ राज्यों में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की छह परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि काम की गति बढ़ाने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों को आधुनिक तकनीक अपनाने और हर स्तर पर निगरानी मजबूत करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस दौरान 20 राज्यों में चल रही पहलों की जानकारी दी।



