नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, सूक्ष्म कण (PM2.5) कैंसर के प्रसार में एक प्रमुख कारक हैं। वर्ष 2000 से 2020 के बीच दुनिया भर में कैंसर के 88.2 लाख मामले इससे जुड़े पाए गए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि PM2.5 के स्तर में प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि होने पर कैंसर का खतरा 16 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ये प्रदूषक रक्तप्रवाह में मिलकर प्रजनन और अंतःस्रावी तंत्र के साथ-साथ थायराइड, स्तन, किडनी और मूत्राशय के कैंसर से भी जुड़े हुए हैं।
भारत के लिए यह स्थिति एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है, क्योंकि यहाँ वायु गुणवत्ता अक्सर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से खराब रहती है। IQAir की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से नौ भारत में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 डीएनए को नुकसान पहुँचाने, पुरानी सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव के जरिए कैंसर को बढ़ावा देते हैं। WHO-IARC ने पहले ही PM2.5 को समूह-1 के मानव कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है, और एम्स (AIIMS) जैसे संस्थान अब इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर गहन शोध कर रहे हैं।



