भारत में वर्ष 2026 के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर नियामक कार्रवाई तेज हो गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और राज्य स्तरीय अधिकारियों ने मिलावट, मानकों में कमी, हानिकारक अवशेषों और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इन कार्रवाइयों में उत्पादों की बिक्री पर रोक, बाजार से वापसी (रिकॉल) और कंपनियों के लाइसेंस निलंबित करना शामिल है। FSSAI ने 29 अगस्त को एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स और लालजी गोधू एंड कंपनी के कुछ 'कंपाउंडेड हींग' उत्पादों पर रोक लगाई, क्योंकि इनमें अल्कोहल-सॉल्यूबल अर्क की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई। इसी तरह, SDP इंडस्ट्रीज के घी उत्पादों में वनस्पति स्टेरॉल (β-sitosterol) मिलने के कारण उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा के दायरे में अन्य उत्पाद भी आए हैं। वंडरलैंड किशमिश के एक बैच को कीटनाशक अवशेषों के कारण वापस मंगाया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक ने 'एनालॉग पनीर' के उत्पादन और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि यह उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहा था। तमिलनाडु में कच्चे अंडे से बनी मेयोनेज़ पर प्रतिबंध जारी है, जबकि FSSAI ने यूनाइटेड स्पिरिट्स और इनब्रू बेवरेजेज जैसी कंपनियों की कुछ व्हिस्की और रम पर भी अनधिकृत फ्लेवरिंग के कारण रोक लगाई है। इसके अतिरिक्त, भ्रामक स्वास्थ्य दावों और गलत लेबलिंग के लिए 150 से अधिक कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सरकार के अनुसार, इन कार्रवाइयों का मुख्य कारण खाद्य सुरक्षा निगरानी और परीक्षणों में आई तेजी है। वर्ष 2025-26 में देश भर में 2.23 लाख से अधिक खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 40,000 से अधिक मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। सरकार ने मोबाइल टेस्टिंग यूनिट्स और रेफरल प्रयोगशालाओं के माध्यम से परीक्षण ढांचे को मजबूत किया है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि ब्रांड चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे किसी एक उत्पाद पर कार्रवाई को पूरी कंपनी के खिलाफ न समझें, बल्कि इसे खाद्य सुरक्षा तंत्र के सुदृढ़ीकरण के रूप में देखें।



