नेपाल के त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र दवाड़ी ने बुधवार को एक बड़ी आपदा के दौरान 1,643 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। लांगटांग लिरुंग चोटी पर ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ ने त्रिशूली घाटी में भारी तबाही मचाई और स्कूल की इमारतें जलमग्न हो गईं। दवाड़ी ने तत्काल स्कूल की घंटी बजाकर छात्रों को ऊंचे स्थानों की ओर जाने का निर्देश दिया। इस दौरान स्कूल के सामाजिक विज्ञान शिक्षक संतोष परियार और सफाईकर्मी सुल्तान लामा की नदी के किनारे वापस जाने के कारण मृत्यु हो गई।
दवाड़ी ने तत्परता दिखाते हुए स्कूल बस चालकों को वापस लौटने का आदेश दिया, हालांकि एक बस पुल पार कर चुकी थी। छात्र पैदल ही सुरक्षित स्थानों की ओर भागे और अंततः एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली। स्थानीय लोग दवाड़ी को नायक मान रहे हैं, लेकिन उन्होंने विनम्रता से कहा कि उन्होंने केवल अपना कर्तव्य निभाया है। इस भीषण आपदा में नेपाल में 750 से अधिक और तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। भू-आकृति विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैली बर्फ और चट्टानों के मलबे ने व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है।



