ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा और अन्य अस्थायी विदेशी कामगारों के लिए मौजूदा 60 दिन की ग्रेस अवधि को समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित इस नियम के अनुसार, नौकरी छूटने के बाद संबंधित व्यक्तियों को तुरंत देश छोड़ना होगा। वर्तमान में यह अवधि उन्हें नई नौकरी तलाशने का अवसर देती है।
इस नीतिगत बदलाव का सबसे अधिक असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा, जो H-1B कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एचसीएल टेक और एलटीआईमाइंडट्री जैसी प्रमुख कंपनियां इन वीजा की मुख्य प्रायोजक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के लिए छंटनी और ऑफबोर्डिंग प्रक्रिया का प्रबंधन करना कठिन हो जाएगा।
यह प्रस्ताव E-1, E-2, L-1, O-1, TN, H-1B1 और E-3 वीजा धारकों पर भी लागू होगा। हालांकि विभाग ने कॉर्पोरेट कामकाज में व्यवधान की संभावना स्वीकार की है, लेकिन सुझाव दिया है कि इन पदों को अमेरिकी नागरिकों से भरा जा सकता है। इस प्रस्तावित नियम पर फिलहाल दो महीने की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि रखी गई है।

