प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा शक्तिशाली अल नीनो तमिलनाडु के आगामी पूर्वोत्तर मानसून (अक्टूबर-दिसंबर) के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि अल नीनो को आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कम बारिश से जोड़ा जाता है, लेकिन तमिलनाडु के लिए इसका प्रभाव अलग हो सकता है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान काफी बढ़ गया है और अल नीनो की स्थिति 2027 तक जारी रहने की संभावना है।
ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, अल नीनो के वर्षों में तमिलनाडु में हमेशा कम बारिश नहीं होती है। वर्ष 1997, 2015 और 2023 जैसे अल नीनो वर्षों में राज्य में अच्छी या अत्यधिक बारिश दर्ज की गई थी। विशेष रूप से 2015 में चेन्नई में भारी बारिश और बाढ़ देखी गई थी, जहां 1 नवंबर से 5 दिसंबर के बीच 1,416.8 मिमी बारिश हुई थी, जबकि सामान्य औसत 408.4 मिमी है। हालांकि, इसके ठीक बाद 2016 में राज्य में भारी बारिश की कमी भी देखी गई थी, जो यह दर्शाता है कि अल नीनो ही एकमात्र कारक नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर मानसून की सफलता बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर के तापमान, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे कारकों पर निर्भर करती है। अल नीनो के साथ गर्म महासागरों का मेल अत्यधिक बारिश, शहरी बाढ़ या लंबे सूखे जैसे विपरीत मौसम का कारण बन सकता है। इसलिए, तमिलनाडु की विशेषज्ञ सलाहकार समिति ने राज्य को केवल सूखे के बजाय विभिन्न प्रकार की आपदाओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।



