कोयंबटूर की रहने वाली एथलीट विद्या रामराज आज भारतीय एथलेटिक्स का एक चमकता सितारा बन चुकी हैं। उनके पिता रामराज ने परिवार के भरण-पोषण के लिए लंबे समय तक वाहन चालक के रूप में कड़ी मेहनत की, जबकि उनकी मां मीना एक गृहिणी हैं। विद्या की जुड़वां बहन नित्या भी एक राष्ट्रीय स्तर की एथलीट हैं और उनकी एक बड़ी बहन सत्या भी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, अपनी बेटियों की प्रतिभा को पहचानते हुए उनकी मां ने विद्या और नित्या को ईरोड के एक स्पोर्ट्स हॉस्टल में भर्ती कराया, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
विद्या ने 2016 से 2019 तक ईरोड के कोंगु आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज से स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप के साथ बीबीए की पढ़ाई पूरी की और बाद में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुईं। वर्तमान में वह भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं। विद्या ने 2023 एशियाई खेलों में 400 मीटर बाधा दौड़ में 55.42 सेकंड का समय लेकर पी.टी. उषा के राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी की थी। इसके बाद 2026 नागोया एशियाई खेलों में उन्होंने 54.75 सेकंड के समय के साथ 42 साल पुराने उस रिकॉर्ड को तोड़कर कांस्य पदक जीता।
2026 के एशियाई खेलों में विद्या ने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 400 मीटर बाधा दौड़ में कांस्य, मिश्रित 4x400 मीटर रिले में रजत और महिला 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। अपने माता-पिता के संघर्ष और जुड़वां बहन नित्या के निरंतर सहयोग से, विद्या रामराज ने आज एशियाई मंच पर भारत का नाम रोशन किया है।


