तमिलनाडु में चावल की कीमतें पिछले 46 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। चावल की प्रति बोरी कीमत में 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है।
राज्य में चावल मिलों की संख्या में आई भारी गिरावट इस संकट का मुख्य कारण है। पहले जहां राज्य में एक लाख चावल मिलें संचालित थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर मात्र 25 हजार रह गई है। धान की आवक कम होने के कारण तंजावुर सहित कई क्षेत्रों में मिलें बंद हो गई हैं, जिसके चलते डेल्टा जिलों के निवासियों को अब अपनी जरूरतों के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले चावल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

