कोशिका जीवन की आधारभूत संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। जिस प्रकार ईंटों से एक इमारत का निर्माण होता है, उसी प्रकार सजीवों का शरीर कोशिकाओं से बना होता है। प्रत्येक कोशिका पोषण प्राप्त करने और ऊर्जा का उपयोग करने जैसी महत्वपूर्ण जैविक क्रियाओं में सक्षम होती है। जटिल जीवों में, कोशिकाएं संगठित होकर ऊतक, अंग और अंग प्रणालियों का निर्माण करती हैं। कोशिका सिद्धांत के अनुसार, सभी सजीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं और नई कोशिकाएं पूर्व-मौजूद कोशिकाओं से ही उत्पन्न होती हैं।
कोशिका के मुख्य भागों में कोशिका झिल्ली (Cell membrane), कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) और केंद्रक (Nucleus) शामिल हैं। कोशिका झिल्ली एक चयनात्मक पारगम्य सीमा के रूप में कार्य करती है, जबकि केंद्रक कोशिका के नियंत्रण केंद्र के रूप में कार्य करता है। महत्वपूर्ण कोशिकांगों में माइटोकॉन्ड्रिया (ऊर्जा उत्पादन), राइबोसोम (प्रोटीन संश्लेषण), क्लोरोप्लास्ट (प्रकाश संश्लेषण) और गोल्जी उपकरण (पदार्थों की पैकेजिंग) प्रमुख हैं। पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (Cell wall) और क्लोरोप्लास्ट पाए जाते हैं, जो जंतु कोशिकाओं में अनुपस्थित होते हैं।
कोशिकाएं एककोशिकीय (जैसे अमीबा) या बहुकोशिकीय (जैसे मनुष्य और पौधे) हो सकती हैं। वायरस को अकोशिकीय (Acellular) माना जाता है क्योंकि उनमें कोई कोशिकीय संगठन नहीं होता। परीक्षा के दृष्टिकोण से यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि परिपक्व मानव लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में केंद्रक नहीं होता है। कोशिका विज्ञान का अध्ययन फसल विकास और जैविक प्रक्रियाओं को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो तमिलनाडु के कृषि परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
