तमिलनाडु की जेलों से कैदियों के फरार होने की हालिया घटनाओं ने राज्य की जेल प्रणाली की सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है। थेनी जिला जेल से 17 कैदियों के भागने और चेन्नई व कोयंबटूर में हुई ऐसी ही घटनाओं के बाद सरकार ने पूर्व डीजीपी जे.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समीक्षा शुरू की है। फरार हुए कुल 20 कैदियों में से 19 को दोबारा पकड़ लिया गया है। इस मामले में जेल महानिदेशक संदीप राय राठौर और थेनी जिला जेल अधीक्षक एन. नागेश्वरन को निलंबित कर दिया गया है।
जेलों में सुरक्षा चूक के अलावा, भारी भीड़ और कर्मचारियों की कमी जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जेलें अपनी स्वीकृत क्षमता से 115 से 160 प्रतिशत अधिक कैदियों के साथ चल रही हैं और सुरक्षा कर्मियों के हजारों पद खाली पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, स्टेशनरी, चिकित्सा आपूर्ति और एलपीजी खरीद में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच भी की जा रही है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जेलों में स्वतंत्र निगरानी के अभाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जिला कलेक्टरों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा अनिवार्य निरीक्षण शायद ही कभी किए जाते हैं। आलोचकों का तर्क है कि सरकार को केवल अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय व्यापक सुधारों के जरिए भ्रष्टाचार और पारदर्शिता से जुड़ी प्रणालीगत समस्याओं का समाधान करना चाहिए।


