मद्रास हाईकोर्ट ने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों द्वारा गोल्ड लोन और गिरवी रखे गए गहनों की नीलामी को विनियमित करने की मांग वाली जनहित याचिका को बंद कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने ए. जोसेफ सगायाराज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा नियामक ढांचे की समीक्षा के बाद यह आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान RBI के वकील ने अदालत को सूचित किया कि केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों के लिए पहले से ही व्यापक दिशा-निर्देश और 'फेयर प्रैक्टिसेज कोड' लागू कर रखा है। इन नियमों में गोल्ड लोन के प्रबंधन और कर्ज न चुकाने पर गिरवी रखी गई संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट निर्देश शामिल हैं।
अदालत ने गौर किया कि RBI अधिनियम 1934 सहित विभिन्न कानूनों के तहत केंद्रीय बैंक के पास गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों पर पर्यवेक्षी अधिकार हैं। अक्टूबर 2023 में जारी मास्टर डायरेक्शन सहित अन्य बाध्यकारी दिशा-निर्देशों के पहले से प्रभावी होने की जानकारी मिलने के बाद, पीठ ने मामले को समाप्त करने का निर्णय लिया।


