पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर शनिवार को हलीशहर में उस समय हमला किया गया, जब वह पुलिस हिरासत में मारे गए तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बिरजू केवट के परिजनों से मिलने जा रही थीं। प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को घेरकर वाहनों पर कीचड़ फेंका और जूते, पानी की बोतलें तथा पत्थर बरसाए। ममता बनर्जी ने इस हमले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें सुरक्षा देने के बजाय भाजपा को संरक्षण दिया।
बिरजू केवट की मौत को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में प्रताड़ना से उसकी मौत हुई, जबकि अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तारी के बाद दिल का दौरा पड़ने से उसकी जान गई। टीएमसी ने हिरासत में मौत की जवाबदेही तय करने की मांग की है, वहीं भाजपा ने निष्पक्ष जांच की वकालत की है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने काफिले पर हुए हमले की निंदा की है। भाजपा नेताओं ने घटना में पार्टी की संलिप्तता से इनकार करते हुए कहा कि वे इस तरह की हिंसा और तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करते हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।




