स्वतंत्र भारत में पहली बार जाति आधारित गणना लद्दाख से शुरू होने जा रही है। यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के जनसंख्या गणना चरण का हिस्सा होगी। अधिकारियों के अनुसार, उत्तरदाताओं के लिए जाति बताने हेतु एक ओपन-एंडेड कॉलम रखा जाएगा। इस पद्धति का परीक्षण इस वर्ष 16 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जा चुका है। लद्दाख में सीमावर्ती संवेदनशील रक्षा ढांचों के कारण, जहाँ जियो-टैगिंग संभव नहीं है, वहां डेटा दर्ज करने के लिए डिजिटल के बजाय कागजी अनुसूचियों का उपयोग किया जाएगा।
लद्दाख के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। इससे पहले 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। जनगणना के लिए मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जिसमें जनसांख्यिकीय डेटा संग्रह और मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि अंतिम प्रश्नावली में लगभग 40 पैरामीटर शामिल होने की संभावना है। यह कवायद 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना से अलग है, जिसे डेटा विश्वसनीयता के मुद्दों के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा था। नई प्रक्रिया का उद्देश्य जाति पहचान के लिए ओपन-कॉलम प्रारूप को बनाए रखते हुए डेटा संग्रह को मानकीकृत करना है।




