राज्य सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण नीति नोट में जवाहरलाल नेहरू, पेरियार ई.वी. रामासामी, बी.आर. अंबेडकर और जस्टिस पार्टी के उल्लेखों को हटाए जाने पर डीएमके ने इसे 'ऐतिहासिक विश्वासघात' करार दिया है। विधानसभा में पेश किए गए इस दस्तावेज में 1951 के आरक्षण आंदोलन और पहले संवैधानिक संशोधन का विवरण भी शामिल नहीं किया गया है, जो पिछली रिपोर्टों का मुख्य हिस्सा हुआ करते थे।
डीएमके की कानूनी शाखा के संयुक्त सचिव आई. परंथमन ने इसे सामाजिक न्याय आंदोलन के इतिहास को मिटाने की सोची-समझी साजिश बताया है। वहीं, वीसीके के महासचिव वी. चिंथनई सेलवन ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगते हुए इतिहास को दबाने के लिए माफी की मांग की है। विवाद बढ़ने पर मंत्री वी. संपत कुमार ने इस चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि सरकार नीति नोट का संशोधित संस्करण प्रकाशित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।



