जनवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन ने नेपाल में भूस्खलन और बाढ़ के खतरों पर नजर रखने वाले 'प्रोजेक्ट SERVIR-हिंदू कुश हिमालय' की फंडिंग बंद कर दी थी। इसके एक साल बाद ही नेपाल और चीन में आए विनाशकारी ग्लेशियर भूस्खलन और बाढ़ में 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। परियोजना के पूर्व निदेशक बीरेंद्र बज्राचार्य ने बताया कि अचानक फंडिंग रुकने से भूस्खलन की निगरानी और ढलान की हलचल का पता लगाने वाली महत्वपूर्ण गतिविधियां ठप हो गईं।
नासा, यूएसएड और इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की यह संयुक्त पहल यूएसएड में व्यापक कटौती का शिकार हुई। बज्राचार्य के अनुसार, परियोजना को बंद करने का निर्णय इतना अचानक था कि इसे किसी अन्य संस्था को सौंपने का समय नहीं मिला। हालांकि, कुछ जल प्रवाह और जंगल की आग की निगरानी से जुड़ी कोशिशें अब भी जारी हैं। उन्होंने कहा कि भले ही यह परियोजना आपदा को पूरी तरह रोक न पाती, लेकिन उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर समुदायों को तैयार करने में यह बेहद जरूरी थी।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि यह कटौती यूएसएड के पुनर्गठन का हिस्सा थी और अमेरिका विश्व मौसम विज्ञान संगठन जैसे अन्य माध्यमों से नेपाल में बाढ़ शमन में मदद कर रहा है। वहीं, भूभौतिकीविद् मार्को टेडेस्को ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते भूगर्भीय खतरों के बीच प्रारंभिक चेतावनी वाली तकनीकों में निरंतर निवेश करना पर्वतीय समुदायों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।



