नेपाल ने हाल ही में भोटकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए भारत, चीन और अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग की है। इस आपदा में अब तक 1,100 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 4,500 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता दान नहीं, बल्कि एक नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
मंत्री खनाल ने कहा कि नेपाल वैश्विक उत्सर्जन में नगण्य योगदान देने के बावजूद जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों को भुगत रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि चीन, अमेरिका और भारत जैसे बड़े उत्सर्जक देशों का ऐतिहासिक उत्तरदायित्व है कि वे नेपाल जैसे संवेदनशील देशों को हुए नुकसान की भरपाई करें। काठमांडू ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाने की योजना बनाई है।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और वन एवं कृषि मंत्री गीता चौधरी ने संयुक्त रूप से 'लॉस एंड डैमेज' फंड बोर्ड को पत्र लिखकर तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। सरकार का कहना है कि आपदा का प्रभाव देश की तात्कालिक प्रतिक्रिया क्षमता से कहीं अधिक है। नेपाल का मानना है कि हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।



