नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल में बचाव और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है। इस आपदा में नेपाल में कम से कम 1,200 और तिब्बत में 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में सैकड़ों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 40 से अधिक पुलों के नष्ट होने के कारण दुर्गम इलाकों और जलविद्युत सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके चलते कई समुदाय हेलीकॉप्टर सहायता पर निर्भर हैं।
अब तक लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन करीब 3,500 लोग विस्थापित होकर भीड़भाड़ वाले आश्रय स्थलों में रहने को मजबूर हैं, जिससे मानसून के दौरान बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। सरकार ने 15 प्रभावित क्षेत्रों में तीन महीने की आपदा अवधि घोषित की है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इसे अप्रत्याशित आपदा बताते हुए जलवायु परिवर्तन के खतरों पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया है। संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने चार महीने की मानवीय अपील जारी की है, वहीं चीनी बचाव दल जिरोंग पोर्ट सीमा के पास ड्रोन की मदद से तलाशी अभियान चला रहे हैं।



