दिल्ली में ढहे 'हॉस्टल डेज़' के रेंट एग्रीमेंट से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अनुबंध में छात्रों को ऐसी शर्तों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाता था, जिसके तहत किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए हॉस्टल प्रबंधन की कोई जिम्मेदारी नहीं होती थी। इसके अलावा, तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का अग्रिम किराया जमा कराने के साथ ही, हॉस्टल छोड़ने या निष्कासन की स्थिति में रिफंड न देने का कड़ा प्रावधान भी शामिल था। लगभग 50 साल पुरानी यह पांच मंजिला इमारत बिना किसी स्वीकृत नक्शे के चल रही थी, जबकि उस क्षेत्र में केवल दो मंजिला निर्माण की ही अनुमति थी।
इस हादसे में सात छात्रों की मौत हो गई, जबकि उस समय बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और राजधानी में छात्र आवासों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई है। हॉस्टल मालिक हरि राम बंसल ने हाल ही में इमारत का नवीनीकरण कराया था, लेकिन अब इसकी संरचनात्मक मजबूती और कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



