नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व के नेताओं से अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की भूमिका को प्रमुखता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचे को विशेषाधिकारों के तंत्र से ऊपर उठकर एक ऐसे सहयोगी मंच के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां हर राष्ट्र की आवाज समान हो।
प्रधानमंत्री ने इस बदलाव के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण पर केंद्रित 'ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप' का प्रस्ताव रखा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समयबद्ध सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अपने नेतृत्व और मतदान ढांचे को आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना चाहिए।
पिछले दो दशकों में ब्रिक्स की परिपक्वता को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यह समूह किसी अन्य राष्ट्र के विरोध के बजाय आम सहमति के आधार पर काम करना जारी रखेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ब्रिक्स अब अपनी आंतरिक एकता को वैश्विक स्तर पर ठोस प्रगति में बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।



