मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने से इनकार कर दिया है। उन पर निजी स्कूलों को मान्यता और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप है, जिसकी जांच सेंट्रल क्राइम ब्रांच कर रही है।
न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि इस स्तर पर ऐसा निर्देश देना उचित नहीं है और उन्होंने पूर्व मंत्री को अग्रिम जमानत याचिका दायर करने का सुझाव दिया। अदालत ने पुलिस को एफआईआर रद्द करने की याचिका पर एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि याचिकाकर्ता 16 सितंबर को आठ घंटे की पूछताछ में शामिल हो चुके हैं।
इसी मामले में अदालत ने सह-आरोपी मुथुकुमार की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।




