मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में सड़कों, गलियों और मोहल्लों के नामों से जातिसूचक शब्दों को हटाने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर इस दिशा में हुई प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह कानूनी कदम न्यायमूर्ति एन. रमेश के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने नामक्कल जिले में 'पल्लर स्ट्रीट' के संदर्भ पर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा कि 1978 के सरकारी आदेशों और 2018 के बाद के न्यायिक निर्देशों के बावजूद जाति-आधारित नाम अभी भी जारी हैं।
न्यायमूर्ति रमेश ने स्पष्ट किया कि जाति के नाम पर सड़कों का नामकरण निवासियों को आधार और राशन कार्ड जैसे आधिकारिक दस्तावेजों पर अपनी जाति की पहचान ढोने के लिए मजबूर करता है, जो जातिविहीन समाज के संवैधानिक लक्ष्य में बाधा है। अदालत ने रेखांकित किया कि यह पहल शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों से जातिगत संदर्भों को हटाने के हालिया प्रयासों का ही विस्तार है।




