भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के साथ पिछले 25 वर्षों का सबसे लंबा मंदी का दौर दर्ज किया गया है। गुरुवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 0.8 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 अंक पर और निफ्टी 50 सूचकांक 0.9 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 अंक पर बंद हुआ। इस भारी बिकवाली के कारण निवेशकों की लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई।
बाजार में इस गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई 3.8 अरब डॉलर की निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल मुख्य कारण रहे। सितंबर माह के निराशाजनक बिक्री आंकड़ों के चलते बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे ऑटोमोबाइल शेयरों पर भारी दबाव देखा गया। हालांकि, निफ्टी आईटी सूचकांक ने विपरीत रुख अपनाते हुए 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।
भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले बाजार में सतर्कता का माहौल है, जिसमें रेपो दर में 25 आधार अंकों की संभावित वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तरलता की कमी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव घरेलू बाजार की बुनियादी स्थिति पर हावी हैं, जिससे निकट भविष्य में बाजार में सुधार की संभावनाएं सीमित दिख रही हैं।




