भारत सरकार चेन्नई और कोलकाता हवाई अड्डों के प्रबंधन को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों को सौंपने पर विचार कर रही है। वर्तमान में ये दोनों ही महानगरों के ऐसे प्रमुख हवाई अड्डे हैं, जिनका संचालन सीधे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले सरकार 11 क्षेत्रीय हवाई अड्डों के मुद्रीकरण के लिए भी इसी तरह के दीर्घकालिक रियायती समझौते कर चुकी है।
तमिलनाडु सरकार द्वारा चेन्नई हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग और पश्चिम बंगाल व पूर्वोत्तर भारत के लिए कोलकाता हवाई अड्डे के महत्व को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि निजी ऑपरेटरों के आने से आवश्यक पूंजी और विशेषज्ञता के माध्यम से परिचालन दक्षता में सुधार होगा। इस प्रस्तावित मॉडल के तहत, हवाई अड्डे का प्रबंधन और विकास निजी संस्थाएं करेंगी, जबकि हवाई यातायात सेवाओं पर नियंत्रण AAI के पास ही रहेगा।
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु हवाई अड्डों के सफल निजीकरण के बाद सरकार इस रणनीति को आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में चेन्नई हवाई अड्डे ने 2.30 करोड़ यात्रियों को सेवा प्रदान की थी, जबकि कोलकाता हवाई अड्डा भी देश के सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों में से एक है।




