राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने आज दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन किया। गठबंधन ने मतदाता सूची में अनियमितताओं और धांधली का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, भाजपा ने इसे राजनीतिक नाटक करार देते हुए राजधानी में जवाबी रैलियां आयोजित कीं, जिसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी का भी उल्लेख किया गया।
प्रदर्शन के मद्देनजर मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 10,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है।
त्योहारी सीजन के दौरान इन प्रदर्शनों से व्यापार पर असर पड़ने को लेकर स्थानीय व्यापारियों ने चिंता जताई है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यातायात जाम से दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों और दुकानदारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। हालांकि, राहुल गांधी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से स्थानीय व्यवसायों का समर्थन करने की अपील की है।




