सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी समूह किसी भी निर्धारित स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और आम नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन होना आवश्यक है। अदालत ने जोर दिया कि प्रदर्शन स्थलों को अलग-अलग समूहों के लिए निश्चित अवधि के आधार पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
यह टिप्पणी दिल्ली के कनॉट प्लेस में जारी प्रदर्शनों के कारण व्यापार पर पड़ रहे असर को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आई। किराना कमेटी दिल्ली की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिका में त्योहारी सीजन के दौरान प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता व्यापारी संघों को एंटी-सीईसी प्रदर्शनों के आयोजकों को इस मामले में पक्षकार बनाना होगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने का दर्जा समाप्त कर दिया है और रामलीला मैदान तथा बुराड़ी ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थानों को इसके लिए निर्धारित किया है।

