इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को गुंडा एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने स्पष्ट किया कि इस कठोर कानून का इस्तेमाल केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अत्यंत सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, न कि उत्पीड़न के एक उपकरण के रूप में।
अदालत ने गोंडा के जिलाधिकारी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जाहिद अली को 'गुंडा' घोषित कर छह महीने के लिए जिले से बाहर कर दिया गया था। पीठ ने पाया कि जिलाधिकारी ने दो आपराधिक मामलों के आधार पर यह कार्रवाई की थी, जिनमें से एक में अली 2017 में ही बरी हो चुके थे। अदालत ने कहा कि बरी हो चुके मामले और अपर्याप्त रिपोर्ट के आधार पर की गई यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता के पिछले रिकॉर्ड और 2026 के आदेश के बीच कोई तार्किक संबंध नहीं है। अधिकारियों द्वारा विवेक का सही इस्तेमाल न करने पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।



