चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण सहित उसके सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ये केवल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि आयुक्तों द्वारा की गई आंतरिक चर्चा या पूछताछ को 2023 के अधिनियम के तहत अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता है।
मतदाता पंजीकरण को लेकर जताई गई चिंताओं पर आयोग ने कहा कि वैधानिक 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान उपयोग किया जाने वाला 'घोषणा पत्र' एक अलग दस्तावेज है। आयोग ने जोर देकर कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी सभी अंतिम आदेशों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के हस्ताक्षर हैं।
सुप्रीम कोर्ट कल याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग करने वाली विपक्षी नेताओं की याचिकाएं भी शामिल हैं। हालांकि अदालत ने पहले कहा था कि वह केवल अखबारों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं करेगी, लेकिन उसने चेतावनी दी है कि कानून के विपरीत पाए गए किसी भी निर्णय को रद्द कर दिया जाएगा।


