भारत में रबी फसलों की बुवाई में इस वर्ष 46 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक केवल 37.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 69.02 लाख हेक्टेयर था। मंत्रालय ने बताया कि सरसों और दलहन की बुवाई में कमी आई है, जबकि गेहूं की बुवाई अभी शुरुआती दौर में है। अधिकारियों के मुताबिक, मिट्टी में नमी की कमी और दिन के उच्च तापमान के कारण बुवाई में देरी हुई है, हालांकि तापमान कम होने के साथ इसमें तेजी आने की उम्मीद है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रबी बुवाई और खरीफ कटाई की समीक्षा की। उन्होंने सूखे और अनियमित बारिश की चुनौतियों के बीच किसानों को हर संभव सहायता देने और कम पानी वाली व जलवायु के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि बुवाई की धीमी गति के बावजूद प्रमुख फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी अधिक चल रहे हैं। पिछले वर्ष गेहूं का रकबा रिकॉर्ड 336 लाख हेक्टेयर रहा था, जिससे 120.66 मिलियन टन उत्पादन हुआ था। अब अधिकारियों का मुख्य ध्यान खरीफ की कटाई के तुरंत बाद रबी की बुवाई में तेजी लाने पर है ताकि मिट्टी की बची हुई नमी का बेहतर उपयोग किया जा सके।


