अंतरराष्ट्रीय बाजार में टूटे चावल की कीमतें 360 डॉलर प्रति टन के स्तर को पार कर गई हैं, जिसके चलते भारत सरकार इसके निर्यात पर फिर से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों के कारण सरकार यह नीतिगत बदलाव करने की योजना बना रही है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर चावल की घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना और कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बाजार पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, इन प्रतिबंधों को लागू करने के लिए अभी तक कोई आधिकारिक समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।

