अमेरिका में वीजा नीतियों में बदलाव, एआई के कारण छंटनी और आव्रजन संबंधी चुनौतियों के चलते बड़ी संख्या में भारतीय टेक पेशेवर स्वदेश लौट रहे हैं। स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 15,100 पेशेवरों के लौटने के बाद, 2026 में अब तक 12,900 पेशेवर भारत वापस आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान आगे चलकर अमेरिका जाने वालों की तुलना में लौटने वालों की संख्या को अधिक कर सकता है।
भारत लौटने वाले इन पेशेवरों को यहां के चुनौतीपूर्ण जॉब मार्केट का सामना करना पड़ रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय अनुभव के बावजूद उन्हें अमेरिकी वेतन का केवल एक-तिहाई या एक-चौथाई हिस्सा ही मिल पा रहा है। कंपनियां अब भौगोलिक अनुभव के बजाय एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे विशेष कौशल को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं।
हालांकि, उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सकारात्मक है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) इन पेशेवरों को उत्पाद विकास और रणनीतिक निर्णय लेने में बड़ी भूमिका दे रहे हैं। इससे भारतीय आईटी क्षेत्र की कार्यक्षमता और विशेषज्ञता में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है।


